1.29 तदेवं प्रसृतो देवः कदाचिच्छक्तिमात्रके ॥२९॥ tadevaṃ prasṛto devaḥ kadācicchaktimātrake tat — इसलिए ; evam — इस प्रकार ; prasṛtaḥ — प्रसृत (स्रवित) हुआ ; devaḥ — देव ; kadācit — कभी ; śaktimātrake — केवल शक्ति-मात्र की (अवस्था) में इसलिए इस प्रकार प्रसृत हुआ देव कभी केवल शक्ति-मात्र की (अवस्था में) —