The Vision of Śiva· 1.29 / 49

The Vision of Śiva1.29

1.29
तदेवं प्रसृतो देवः कदाचिच्छक्तिमात्रके ॥२९॥
tadevaṃ prasṛto devaḥ kadācicchaktimātrake
— इसलिए ; — इस प्रकार ; — प्रसृत (स्रवित) हुआ ; — देव ; — कभी ; — केवल शक्ति-मात्र की (अवस्था) में

इसलिए इस प्रकार प्रसृत हुआ देव कभी केवल शक्ति-मात्र की (अवस्था में) —