yatkiṃcid bhairave tantre sarvam asmāt prasidhyati |
mantravīryasamāveśaprabhāvān na niyantriṇā
— जो कुछ भी; — भैरव (तन्त्र) में; — तन्त्र में; — सब, समस्त; — इससे; — सिद्ध होता है, सफल होता है; — मन्त्र के वीर्य में आवेश (समावेश) के प्रभाव से; — नहीं; — किसी नियामक/नियन्त्रण से (बाह्य नियन्त्रक की आवश्यकता नहीं)
भैरव तन्त्र में जो कुछ भी है, वह सब इसी से सिद्ध होता है — मन्त्र के वीर्य में आवेश (समावेश) के प्रभाव से, न कि किसी नियामक (बाह्य नियन्त्रण) से।