मन्मना भव मद्भक्तो मद्याजी मां नमस्कुरु ।
मामेवैष्यसि युक्त्वैवमात्मानं मत्परायणः ॥
९-३५ ॥
manmanā bhava madbhakto madyājī māṃ namaskuru |
māmevaiṣyasi yuktvaivamātmānaṃ matparāyaṇaḥ ||
9-35 ||
मुझमें मन वाला हो, मेरा भक्त हो, मेरा पूजक हो, मुझे नमस्कार कर; इस प्रकार अपने को (मुझमें) जोड़कर और मेरे परायण होकर तू मुझे ही प्राप्त होगा।