Bhagavad Gītā (Kashmirian recension)· 9.35 / 35

Bhagavad Gītā (Kashmirian recension)9.35

9.35
मन्मना भव मद्भक्तो मद्याजी मां नमस्कुरु । मामेवैष्यसि युक्त्वैवमात्मानं मत्परायणः ॥ ९-३५ ॥
manmanā bhava madbhakto madyājī māṃ namaskuru | māmevaiṣyasi yuktvaivamātmānaṃ matparāyaṇaḥ || 9-35 ||
— मुझमें मन वाला हो, मेरा भक्त ; — मेरा पूजक, मुझे नमस्कार कर ; — मुझे ही प्राप्त होगा, इस प्रकार जोड़कर ; — अपने को, मेरे परायण होकर

मुझमें मन वाला हो, मेरा भक्त हो, मेरा पूजक हो, मुझे नमस्कार कर; इस प्रकार अपने को (मुझमें) जोड़कर और मेरे परायण होकर तू मुझे ही प्राप्त होगा।