Bhagavad Gītā (Kashmirian recension)· 9.34 / 35

Bhagavad Gītā (Kashmirian recension)9.34

9.34
किं पुनर्ब्राह्मणाः पुण्या भक्ता राजर्षयस्तथा । अनित्यमसुखं लोकमिमं प्राप्य भजस्व माम् ॥ ९-३४ ॥
kiṃ punarbrāhmaṇāḥ puṇyā bhaktā rājarṣayastathā | anityamasukhaṃ lokamimaṃ prāpya bhajasva mām || 9-34 ||
— फिर पुण्यशील ब्राह्मण तो कहना ही क्या ; — भक्त और राजर्षि भी ; — इस अनित्य, सुखरहित लोक को ; — प्राप्त करके मुझे भज

फिर पुण्यशील ब्राह्मण और भक्त राजर्षि तो कहना ही क्या! इस अनित्य और सुखरहित लोक को प्राप्त करके तू मुझे भज।