Bhagavad Gītā (Kashmirian recension)· 9.33 / 35

Bhagavad Gītā (Kashmirian recension)9.33

9.33
मां हि पार्थ व्यपाश्रित्य येऽपि स्युः पापयोनयः । स्त्रियो वैश्यास्तथा शूद्रास्तेऽपि यान्ति परां गतिम् ॥ ९-३३ ॥
māṃ hi pārtha vyapāśritya ye'pi syuḥ pāpayonayaḥ | striyo vaiśyāstathā śūdrāste'pi yānti parāṃ gatim || 9-33 ||
— मेरा आश्रय लेकर, हे पार्थ ; — जो पापयोनि वाले भी हों ; — स्त्रियाँ, वैश्य, तथा शूद्र ; — वे भी परम गति को प्राप्त होते हैं

हे पार्थ, मेरा आश्रय लेकर जो पापयोनि (नीच कुल) वाले हों — स्त्रियाँ, वैश्य, तथा शूद्र — वे भी परम गति को प्राप्त होते हैं।