भूय एव महाबाहो शृणु मे परमं वचः ।
यत्तेऽहं प्रीयमाणाय वक्ष्यामि हितकाम्यया ॥
१०-१ ॥
bhūya eva mahābāho śṛṇu me paramaṃ vacaḥ |
yatte'haṃ prīyamāṇāya vakṣyāmi hitakāmyayā ||
10-1 ||
हे महाबाहु, फिर मेरे परम वचन को सुन, जिसे मैं तुझ प्रिय (मुझमें प्रीति रखने वाले) से तेरे हित की कामना से कहूँगा।