Bhagavad Gītā (Kashmirian recension)· 9.18 / 35

Bhagavad Gītā (Kashmirian recension)9.18

9.18
पिताहमस्य जगतो माता धाता पितामहः । वेद्यं पवित्रमोङ्कार ऋक्साम यजुरेव च ॥ ९-१८ ॥
pitāhamasya jagato mātā dhātā pitāmahaḥ | vedyaṃ pavitramoṅkāra ṛksāma yajureva ca || 9-18 ||
— इस जगत् का पिता मैं ; — माता, धाता, पितामह ; — जानने योग्य, पवित्र, ओंकार ; — और ऋक्, साम, यजुस् भी

मैं इस जगत् का पिता, माता, धाता और पितामह हूँ; मैं जानने योग्य वस्तु, पवित्र करने वाला, ओंकार, तथा ऋक्, साम और यजुस् भी हूँ।