Bhagavad Gītā (Kashmirian recension)9.10
न च मां तानि कर्माणि निबध्नन्ति धनञ्जय ।
उदासीनवदासीनमसक्तं तेषु कर्मसु ॥
९-१० ॥
na ca māṃ tāni karmāṇi nibadhnanti dhanañjaya |
udāsīnavadāsīnamasaktaṃ teṣu karmasu ||
9-10 ||
— और मुझे वे कर्म ; — नहीं बाँधते, हे धनञ्जय ; — उदासीन के समान स्थित ; — उन कर्मों में अनासक्त हे धनञ्जय, उदासीन के समान स्थित और उन कर्मों में अनासक्त मुझे वे कर्म नहीं बाँधते।