Bhagavad Gītā (Kashmirian recension)· 9.10 / 35

Bhagavad Gītā (Kashmirian recension)9.10

9.10
न च मां तानि कर्माणि निबध्नन्ति धनञ्जय । उदासीनवदासीनमसक्तं तेषु कर्मसु ॥ ९-१० ॥
na ca māṃ tāni karmāṇi nibadhnanti dhanañjaya | udāsīnavadāsīnamasaktaṃ teṣu karmasu || 9-10 ||
— और मुझे वे कर्म ; — नहीं बाँधते, हे धनञ्जय ; — उदासीन के समान स्थित ; — उन कर्मों में अनासक्त

हे धनञ्जय, उदासीन के समान स्थित और उन कर्मों में अनासक्त मुझे वे कर्म नहीं बाँधते।