Bhagavad Gītā (Kashmirian recension)· 8.7 / 28

Bhagavad Gītā (Kashmirian recension)8.7

8.7
तस्मात् सर्वेषु कालेषु मामनुस्मर युध्य च । मदर्पितमनोबुद्धिर्मामेवैष्यस्यसंशयम् ॥ ८-७ ॥
tasmāt sarveṣu kāleṣu māmanusmara yudhya ca | madarpitamanobuddhirmāmevaiṣyasyasaṃśayam || 8-7 ||
— अतः समस्त कालों में ; — मेरा स्मरण कर और युद्ध कर ; — मुझमें अर्पित मन-बुद्धि वाला ; — तू मुझे ही निःसंशय प्राप्त होगा

अतः समस्त कालों में मेरा स्मरण कर और युद्ध कर; मुझमें अर्पित मन और बुद्धि वाला तू निःसंशय मुझे ही प्राप्त होगा।