Bhagavad Gītā (Kashmirian recension)· 7.9 / 30

Bhagavad Gītā (Kashmirian recension)7.9

7.9
पुण्यः पृथिव्यां गन्धोऽस्मि तेजश्चाऽस्मि विभावसौ । जीवनं सर्वभूतेषु तपश्चाऽस्मि तपस्विषु ॥ ७-९ ॥
puṇyaḥ pṛthivyāṃ gandho'smi tejaścā'smi vibhāvasau | jīvanaṃ sarvabhūteṣu tapaścā'smi tapasviṣu || 7-9 ||
— पृथ्वी में पवित्र गन्ध मैं हूँ ; — और अग्नि में तेज ; — समस्त भूतों में जीवन ; — और तपस्वियों में तप

मैं पृथ्वी में पवित्र गन्ध हूँ और अग्नि में तेज हूँ, समस्त भूतों में जीवन हूँ, और तपस्वियों में तप हूँ।