Bhagavad Gītā (Kashmirian recension)· 7.23 / 30

Bhagavad Gītā (Kashmirian recension)7.23

7.23
अन्तवत्तु फलं तेषां तद्भवत्यल्पमेधसाम् । देवान्देवयजो यान्ति मद्भक्ता यान्ति मामपि ॥ ७-२३ ॥
antavattu phalaṃ teṣāṃ tadbhavatyalpamedhasām | devāndevayajo yānti madbhaktā yānti māmapi || 7-23 ||
— किन्तु उन का फल अन्तवान् ; — वह अल्पबुद्धि वालों का होता है ; — देवताओं को पूजने वाले देवताओं को जाते हैं ; — मेरे भक्त मुझे ही प्राप्त होते हैं

किन्तु उन अल्पबुद्धि वालों का वह फल अन्तवान् (नाशवान्) होता है; देवताओं को पूजने वाले देवताओं को प्राप्त होते हैं, किन्तु मेरे भक्त मुझे ही प्राप्त होते हैं।