Bhagavad Gītā (Kashmirian recension)· 6.3 / 49

Bhagavad Gītā (Kashmirian recension)6.3

6.3
आरुरुक्षोर्मुनेर्योगं कर्म कारणमुच्यते । योगारूढस्य तस्यैव शमः कारणमुच्यते ॥ ६-३ ॥
ārurukṣormuneryogaṃ karma kāraṇamucyate | yogārūḍhasya tasyaiva śamaḥ kāraṇamucyate || 6-3 ||
— योग में आरूढ़ होने की इच्छा वाले मुनि के लिए ; — कर्म साधन कहा गया ; — योगारूढ़ हो चुके उसी के लिए ; — शम (शान्ति) साधन कहा गया

योग में आरूढ़ होने की इच्छा रखने वाले मुनि के लिए कर्म साधन कहा गया है; और योगारूढ़ हो चुके उसी के लिए शम (शान्ति) साधन कहा गया है।