प्रशान्तात्मा विगतभीर्ब्रह्मचारिव्रते स्थितः ।
मनः संयम्य मच्चित्तो युक्त आसीत मत्परः ॥
६-१५ ॥
praśāntātmā vigatabhīrbrahmacārivrate sthitaḥ |
manaḥ saṃyamya maccitto yukta āsīta matparaḥ ||
6-15 ||
प्रशान्त आत्मा वाला, भयरहित, ब्रह्मचर्य व्रत में स्थित होकर, मन को संयत करके, मुझमें चित्त लगाकर, मेरे परायण होकर युक्त बैठे।