विद्याविनयसम्पन्ने ब्राह्मणे गवि हस्तिनि ।
शुनि चैव श्वपाके च पण्डिताः समदर्शिनः ॥
५-१९ ॥
vidyāvinayasampanne brāhmaṇe gavi hastini |
śuni caiva śvapāke ca paṇḍitāḥ samadarśinaḥ ||
5-19 ||
विद्या और विनय से सम्पन्न ब्राह्मण में, गौ में, हाथी में, कुत्ते में, और कुत्ता पकाने वाले चाण्डाल में भी पण्डित जन समान दृष्टि वाले होते हैं।