Bhagavad Gītā (Kashmirian recension)· 5.19 / 29

Bhagavad Gītā (Kashmirian recension)5.19

5.19
विद्याविनयसम्पन्ने ब्राह्मणे गवि हस्तिनि । शुनि चैव श्वपाके च पण्डिताः समदर्शिनः ॥ ५-१९ ॥
vidyāvinayasampanne brāhmaṇe gavi hastini | śuni caiva śvapāke ca paṇḍitāḥ samadarśinaḥ || 5-19 ||
— विद्या और विनय से सम्पन्न में ; — ब्राह्मण, गौ, हाथी में ; — कुत्ते और चाण्डाल में भी ; — पण्डित समदर्शी होते हैं

विद्या और विनय से सम्पन्न ब्राह्मण में, गौ में, हाथी में, कुत्ते में, और कुत्ता पकाने वाले चाण्डाल में भी पण्डित जन समान दृष्टि वाले होते हैं।