Bhagavad Gītā (Kashmirian recension)· 4.39 / 42

Bhagavad Gītā (Kashmirian recension)4.39

4.39
श्रद्धावांल्लभते ज्ञानं तत्परः संयतेन्द्रियः । ज्ञानं लब्ध्वा परां शान्तिमचिरेणाधिगच्छति ॥ ४-३९ ॥
śraddhāvāṃllabhate jñānaṃ tatparaḥ saṃyatendriyaḥ | jñānaṃ labdhvā parāṃ śāntimacireṇādhigacchati || 4-39 ||
— श्रद्धावान् ज्ञान को पाता है ; — तत्पर, जितेन्द्रिय ; — ज्ञान पाकर परम शान्ति को ; — शीघ्र ही प्राप्त करता है

श्रद्धावान्, तत्पर और जितेन्द्रिय पुरुष ज्ञान को प्राप्त करता है; और ज्ञान प्राप्त करके वह शीघ्र ही परम शान्ति को प्राप्त होता है।