Bhagavad Gītā (Kashmirian recension)· 4.37 / 42

Bhagavad Gītā (Kashmirian recension)4.37

4.37
यथैधांसि समिद्धोऽग्निर्भस्मसात् कुरुतेऽर्जुन । ज्ञानाग्निः सर्वकर्माणि भस्मसात्कुरुते तथा ॥ ४-३७ ॥
yathaidhāṃsi samiddho'gnirbhasmasāt kurute'rjuna | jñānāgniḥ sarvakarmāṇi bhasmasātkurute tathā || 4-37 ||
— जैसे प्रज्वलित अग्नि ईंधन को ; — भस्म कर देती है, हे अर्जुन ; — ज्ञानाग्नि समस्त कर्मों को ; — वैसे ही भस्म कर देती है

हे अर्जुन, जैसे प्रज्वलित अग्नि ईंधन को भस्म कर देती है, वैसे ही ज्ञान-रूपी अग्नि समस्त कर्मों को भस्म कर देती है।