Bhagavad Gītā (Kashmirian recension)· 2.65 / 74

Bhagavad Gītā (Kashmirian recension)2.65

2.65
क्रोधाद्भवति सम्मोहः सम्मोहात्स्मृतिविभ्रमः । स्मृतिभ्रंशाद्बुद्धिनाशो बुद्धिनाशात् प्रणश्यति ॥ २-६५ ॥
krodhādbhavati sammohaḥ sammohātsmṛtivibhramaḥ | smṛtibhraṃśādbuddhināśo buddhināśāt praṇaśyati || 2-65 ||
— क्रोध से सम्मोह होता है ; — सम्मोह से स्मृति का भ्रम ; — स्मृति के भ्रंश से बुद्धि का नाश ; — बुद्धि के नाश से वह नष्ट हो जाता है

क्रोध से सम्मोह होता है, सम्मोह से स्मृति का भ्रम होता है; स्मृति के भ्रंश से बुद्धि का नाश होता है, और बुद्धि के नाश से मनुष्य नष्ट हो जाता है।