क्रोधाद्भवति सम्मोहः सम्मोहात्स्मृतिविभ्रमः ।
स्मृतिभ्रंशाद्बुद्धिनाशो बुद्धिनाशात् प्रणश्यति ॥
२-६५ ॥
krodhādbhavati sammohaḥ sammohātsmṛtivibhramaḥ |
smṛtibhraṃśādbuddhināśo buddhināśāt praṇaśyati ||
2-65 ||
क्रोध से सम्मोह होता है, सम्मोह से स्मृति का भ्रम होता है; स्मृति के भ्रंश से बुद्धि का नाश होता है, और बुद्धि के नाश से मनुष्य नष्ट हो जाता है।