Bhagavad Gītā (Kashmirian recension)· 2.64 / 74

Bhagavad Gītā (Kashmirian recension)2.64

2.64
ध्यायतो विषयान्पुंसः सङ्गस्तेषूपजायते । सङ्गात् सञ्जायते कामः कामात्क्रोधोऽभिजायते ॥ २-६४ ॥
dhyāyato viṣayānpuṃsaḥ saṅgasteṣūpajāyate | saṅgāt sañjāyate kāmaḥ kāmātkrodho'bhijāyate || 2-64 ||
— विषयों का चिन्तन करने वाले पुरुष की ; — उनमें आसक्ति उत्पन्न होती है ; — आसक्ति से कामना उत्पन्न होती है ; — कामना से क्रोध उत्पन्न होता है

विषयों का चिन्तन करने वाले पुरुष की उनमें आसक्ति उत्पन्न होती है; आसक्ति से कामना उत्पन्न होती है, और कामना से क्रोध उत्पन्न होता है।