Bhagavad Gītā (Kashmirian recension)· 2.56 / 74

Bhagavad Gītā (Kashmirian recension)2.56

2.56
स्थितप्रज्ञस्य का भाषा समाधिस्थस्य केशव । स्थिरधीः किं प्रभाषेत किमासीत व्रजेच्च किम् ॥ २-५६ ॥
sthitaprajñasya kā bhāṣā samādhisthasya keśava | sthiradhīḥ kiṃ prabhāṣeta kimāsīta vrajecca kim || 2-56 ||
— स्थितप्रज्ञ का क्या लक्षण ; — समाधि में स्थित का ; — हे केशव ; — स्थिर बुद्धि वाला कैसे बोलता है ; — कैसे बैठता है और कैसे चलता है

हे केशव, समाधि में स्थित स्थितप्रज्ञ का क्या लक्षण है? स्थिर बुद्धि वाला कैसे बोलता है, कैसे बैठता है और कैसे चलता है?