Bhagavad Gītā (Kashmirian recension)· 2.19 / 74

Bhagavad Gītā (Kashmirian recension)2.19

2.19
अन्तवन्त इमे देहा नित्यस्योक्ताः शरीरिणः । विनाशिनोऽप्रमेयस्य तस्माद्युद्ध्यस्व भारत ! ॥ २-१९ ॥
antavanta ime dehā nityasyoktāḥ śarīriṇaḥ | vināśino'prameyasya tasmādyuddhyasva bhārata ! || 2-19 ||
— ये शरीर अन्तवान् (नाशवान्) हैं ; — नित्य देही के कहे गए ; — अविनाशी, अप्रमेय के ; — अतः युद्ध कर ; — हे भारत

नित्य, अविनाशी और अप्रमेय देही (आत्मा) के ये शरीर अन्तवान् कहे गए हैं; अतः हे भारत, युद्ध करो।