अविनाशि तु तद्विद्धि येन सर्वमिदं ततम् ।
विनाशमव्ययस्यास्य न कश्चित्कर्तुमर्हति ॥
२-१८ ॥
avināśi tu tadviddhi yena sarvamidaṃ tatam |
vināśamavyayasyāsya na kaścitkartumarhati ||
2-18 ||
किन्तु जिससे यह समस्त व्याप्त है, उसे अविनाशी जानो; इस अव्यय (आत्मा) का विनाश करने में कोई समर्थ नहीं।