Bhagavad Gītā (Kashmirian recension)· 2.18 / 74

Bhagavad Gītā (Kashmirian recension)2.18

2.18
अविनाशि तु तद्विद्धि येन सर्वमिदं ततम् । विनाशमव्ययस्यास्य न कश्चित्कर्तुमर्हति ॥ २-१८ ॥
avināśi tu tadviddhi yena sarvamidaṃ tatam | vināśamavyayasyāsya na kaścitkartumarhati || 2-18 ||
— किन्तु उसे अविनाशी जान ; — जिससे यह समस्त व्याप्त है ; — इस अव्यय का विनाश ; — कोई करने में समर्थ नहीं

किन्तु जिससे यह समस्त व्याप्त है, उसे अविनाशी जानो; इस अव्यय (आत्मा) का विनाश करने में कोई समर्थ नहीं।