Bhagavad Gītā (Kashmirian recension)· 18.67 / 78

Bhagavad Gītā (Kashmirian recension)18.67

18.67
इदं ते नातपस्काय नाभक्ताय कदाचन । न चाशुश्रूषवे वाच्यं न च मां योऽभ्यसूयति ॥ १८-६७ ॥
idaṃ te nātapaskāya nābhaktāya kadācana | na cāśuśrūṣave vācyaṃ na ca māṃ yo'bhyasūyati || 18-67 ||
— तेरा यह, न तपरहित को ; — न भक्तिरहित को कभी ; — न सुनने की इच्छा न रखने वाले को कहना चाहिए ; — और न जो मुझसे द्वेष करता है

तेरा यह (ज्ञान) न तपरहित को, न भक्तिरहित को कभी, न सुनने की इच्छा न रखने वाले को, और न जो मुझसे द्वेष करता है उसे कहना चाहिए।