Bhagavad Gītā (Kashmirian recension)· 18.66 / 78

Bhagavad Gītā (Kashmirian recension)18.66

18.66
सर्वधर्मान्परित्यज्य मामेकं शरणं व्रज । अहं त्वां सर्वपापेभ्यो मोक्षयिष्यामि मा शुचः ॥ १८-६६ ॥
sarvadharmānparityajya māmekaṃ śaraṇaṃ vraja | ahaṃ tvāṃ sarvapāpebhyo mokṣayiṣyāmi mā śucaḥ || 18-66 ||
— समस्त धर्मों को त्यागकर ; — केवल मेरी ही शरण में आ ; — मैं तुझे समस्त पापों से ; — मुक्त कर दूँगा, शोक मत कर

समस्त धर्मों को त्यागकर तू केवल मेरी ही शरण में आ; मैं तुझे समस्त पापों से मुक्त कर दूँगा — शोक मत कर।