Bhagavad Gītā (Kashmirian recension)· 18.24 / 78

Bhagavad Gītā (Kashmirian recension)18.24

18.24
यत्तु कामेप्सुना कर्म साहङ्कारेण वा पुनः । क्रियते क्लेशबहुलं तद्राजसमिति स्मृतम् ॥ १८-२४ ॥
yattu kāmepsunā karma sāhaṅkāreṇa vā punaḥ | kriyate kleśabahulaṃ tadrājasamiti smṛtam || 18-24 ||
— किन्तु कामना रखने वाले से जो कर्म ; — अथवा फिर अहंकार से ; — किया जाता है, बहुत कष्ट के साथ ; — वह राजस माना गया

किन्तु जो कर्म कामना रखने वाले के द्वारा, अथवा फिर अहंकार से युक्त होकर, बहुत कष्ट के साथ किया जाता है — वह राजस माना गया है।