Bhagavad Gītā (Kashmirian recension)· 18.20 / 78

Bhagavad Gītā (Kashmirian recension)18.20

18.20
सर्वभूतेषु येनैकं भावमव्ययमीक्षते । अविभक्तं विभक्तेषु तज्ज्ञानं विद्धि सात्त्विकम् ॥ १८-२० ॥
sarvabhūteṣu yenaikaṃ bhāvamavyayamīkṣate | avibhaktaṃ vibhakteṣu tajjñānaṃ viddhi sāttvikam || 18-20 ||
— समस्त भूतों में जिससे एक ; — अव्यय भाव को देखता है ; — विभक्तों में अविभक्त को ; — उस ज्ञान को सात्त्विक जान

जिस ज्ञान से मनुष्य समस्त भूतों में एक अव्यय भाव को, विभक्तों में अविभक्त को देखता है — उस ज्ञान को सात्त्विक जान।