Bhagavad Gītā (Kashmirian recension)· 18.19 / 78

Bhagavad Gītā (Kashmirian recension)18.19

18.19
ज्ञानं कर्म च कर्ता च त्रिधैव गुणभेदतः । प्रोच्यते गुणसङ्ख्याने यथावच्छृणु तान्यपि ॥ १८-१९ ॥
jñānaṃ karma ca kartā ca tridhaiva guṇabhedataḥ | procyate guṇasaṅkhyāne yathāvacchṛṇu tānyapi || 18-19 ||
— ज्ञान, कर्म और कर्ता ; — गुणों के भेद से तीन-तीन प्रकार ; — गुणों की गणना में कहे जाते हैं ; — उन्हें भी यथावत् सुन

गुणों की गणना (सांख्य) में ज्ञान, कर्म और कर्ता गुणों के भेद से तीन-तीन प्रकार के कहे जाते हैं; उन्हें भी यथावत् सुन।