Bhagavad Gītā (Kashmirian recension)· 16.5 / 24

Bhagavad Gītā (Kashmirian recension)16.5

16.5
दैवी सम्पद्विमोक्षाय निबन्धायासुरी मता । मा शुचः सम्पदं दैवीमभिजातोऽसि पाण्डव ॥ १६-५ ॥
daivī sampadvimokṣāya nibandhāyāsurī matā | mā śucaḥ sampadaṃ daivīmabhijāto'si pāṇḍava || 16-5 ||
— दैवी सम्पदा मोक्ष के लिए ; — आसुरी बन्धन के लिए मानी गई ; — शोक मत कर, दैवी सम्पदा को ; — तू लेकर उत्पन्न हुआ है, हे पाण्डव

दैवी सम्पदा मोक्ष के लिए और आसुरी बन्धन के लिए मानी गई है; हे पाण्डव, शोक मत कर, तू दैवी सम्पदा को लेकर उत्पन्न हुआ है।