Bhagavad Gītā (Kashmirian recension)· 16.6 / 24

Bhagavad Gītā (Kashmirian recension)16.6

16.6
द्वौ भूतसर्गौ लोकेऽस्मिन् दैव आसुर एव च । दैवो विस्तरतः प्रोक्त आसुरं पार्थ मे शृणु ॥ १६-६ ॥
dvau bhūtasargau loke'smin daiva āsura eva ca | daivo vistarataḥ prokta āsuraṃ pārtha me śṛṇu || 16-6 ||
— इस लोक में भूतों की दो सृष्टियाँ ; — दैवी और आसुरी ; — दैवी का विस्तार से वर्णन हुआ ; — आसुरी को मुझसे सुन, हे पार्थ

इस लोक में भूतों की दो सृष्टियाँ हैं — दैवी और आसुरी। दैवी का विस्तार से वर्णन किया गया; हे पार्थ, आसुरी को मुझसे सुन।