Bhagavad Gītā (Kashmirian recension)· 15.1 / 20

Bhagavad Gītā (Kashmirian recension)15.1

15.1
ऊर्ध्वमूलमधः शाखमश्वत्थं प्राहुरव्ययम् । छन्दांसि यस्य पर्णानि यस्तं वेद स वेदवित् ॥ १५-१ ॥
ūrdhvamūlamadhaḥ śākhamaśvatthaṃ prāhuravyayam | chandāṃsi yasya parṇāni yastaṃ veda sa vedavit || 15-1 ||
— ऊपर मूल, नीचे शाखाओं वाले ; — अव्यय अश्वत्थ का वर्णन करते हैं ; — जिसके पत्ते छन्द (वेद) ; — जो इसे जानता है वह वेदवेत्ता

वे ऊपर मूल और नीचे शाखाओं वाले अव्यय अश्वत्थ वृक्ष का वर्णन करते हैं, जिसके पत्ते छन्द (वेद) हैं; जो इसे जानता है, वह वेदवेत्ता है।