सर्वद्वारेषु देहेऽस्मिन्प्रकाशमुपजायते ।
ज्ञानं यदा तदा विद्याद्विवृद्धं सत्त्वमित्युत ॥
१४-११ ॥
sarvadvāreṣu dehe'sminprakāśamupajāyate |
jñānaṃ yadā tadā vidyādvivṛddhaṃ sattvamityuta ||
14-11 ||
जब इस देह के समस्त द्वारों में ज्ञान का प्रकाश उत्पन्न होता है, तब जानना चाहिए कि सत्त्व बढ़ा हुआ है।