Bhagavad Gītā (Kashmirian recension)· 13.7 / 35

Bhagavad Gītā (Kashmirian recension)13.7

13.7
इच्छा द्वेषः सुखं दुःखं सङ्घातश्चेतना धृतिः । एतत्क्षेत्रं समासेन सविकारमुदाहृतम् ॥ १३-७ ॥
icchā dveṣaḥ sukhaṃ duḥkhaṃ saṅghātaścetanā dhṛtiḥ | etatkṣetraṃ samāsena savikāramudāhṛtam || 13-7 ||
— इच्छा, द्वेष, सुख, दुःख ; — संघात (शरीर-समूह), चेतना, धृति ; — यह संक्षेप में क्षेत्र ; — विकार-सहित कहा गया

इच्छा, द्वेष, सुख, दुःख, संघात (शरीर-समूह), चेतना और धृति — यह संक्षेप में विकार-सहित क्षेत्र कहा गया है।