Bhagavad Gītā (Kashmirian recension)· 13.6 / 35

Bhagavad Gītā (Kashmirian recension)13.6

13.6
महाभूतान्यहङ्कारो बुद्धिरव्यक्तमेव च । इन्द्रियाणि दशैकं च पञ्च चेन्द्रियगोचराः ॥ १३-६ ॥
mahābhūtānyahaṅkāro buddhiravyaktameva ca | indriyāṇi daśaikaṃ ca pañca cendriyagocarāḥ || 13-6 ||
— महाभूत, अहंकार ; — बुद्धि और अव्यक्त ; — दस इन्द्रियाँ और एक (मन) ; — और पाँच इन्द्रियों के विषय

महाभूत, अहंकार, बुद्धि और अव्यक्त, दस इन्द्रियाँ और एक (मन), तथा पाँच इन्द्रियों के विषय;