Bhagavad Gītā (Kashmirian recension)· 13.19 / 35

Bhagavad Gītā (Kashmirian recension)13.19

13.19
एतत्क्षेत्रं तथा ज्ञानं ज्ञेयं चोक्तं समासतः । मद्भक्त एतद्विज्ञाय मद्भावायोपपद्यते ॥ १३-१९ ॥
etatkṣetraṃ tathā jñānaṃ jñeyaṃ coktaṃ samāsataḥ | madbhakta etadvijñāya madbhāvāyopapadyate || 13-19 ||
— इस प्रकार क्षेत्र और ज्ञान ; — और ज्ञेय संक्षेप में कहे गए ; — मेरा भक्त इसे भली-भाँति जानकर ; — मेरे भाव के योग्य हो जाता है

इस प्रकार क्षेत्र, ज्ञान और ज्ञेय संक्षेप में कहे गए; मेरा भक्त इसे भली-भाँति जानकर मेरे भाव के योग्य हो जाता है।