अभ्यासेऽप्यसमर्थोः सन्मत्कर्मपरमो भव ।
मदर्थमपि कर्माणि कुर्वन्सिद्धिमवाप्स्यसि ॥
१२-१० ॥
abhyāse'pyasamarthoḥ sanmatkarmaparamo bhava |
madarthamapi karmāṇi kurvansiddhimavāpsyasi ||
12-10 ||
यदि अभ्यास में भी असमर्थ हो, तो मेरे कर्म में तत्पर हो जा; मेरे लिए कर्मों को करता हुआ भी तू सिद्धि को प्राप्त करेगा।