Bhagavad Gītā (Kashmirian recension)· 12.10 / 20

Bhagavad Gītā (Kashmirian recension)12.10

12.10
अभ्यासेऽप्यसमर्थोः सन्मत्कर्मपरमो भव । मदर्थमपि कर्माणि कुर्वन्सिद्धिमवाप्स्यसि ॥ १२-१० ॥
abhyāse'pyasamarthoḥ sanmatkarmaparamo bhava | madarthamapi karmāṇi kurvansiddhimavāpsyasi || 12-10 ||
— अभ्यास में भी असमर्थ होने पर ; — मेरे कर्म में तत्पर हो जा ; — मेरे लिए कर्मों को ; — करता हुआ तू सिद्धि को पाएगा

यदि अभ्यास में भी असमर्थ हो, तो मेरे कर्म में तत्पर हो जा; मेरे लिए कर्मों को करता हुआ भी तू सिद्धि को प्राप्त करेगा।