Bhagavad Gītā (Kashmirian recension)· 12.11 / 20

Bhagavad Gītā (Kashmirian recension)12.11

12.11
अथैतदप्यशक्तोऽसि कर्तुं मद्योगमास्थितः । सर्वकर्मफलत्यागं ततः कुरु यतात्मवान् ॥ १२-११ ॥
athaitadapyaśakto'si kartuṃ madyogamāsthitaḥ | sarvakarmaphalatyāgaṃ tataḥ kuru yatātmavān || 12-11 ||
— और यदि यह भी असमर्थ हो ; — करने में, तो मेरे योग का आश्रय लेकर ; — समस्त कर्मों के फल का त्याग ; — फिर कर, आत्मसंयमी होकर

और यदि यह करने में भी असमर्थ हो, तो मेरे योग का आश्रय लेकर, आत्मसंयमी होकर, समस्त कर्मों के फल का त्याग कर।