Bhagavad Gītā (Kashmirian recension)· 11.41 / 60

Bhagavad Gītā (Kashmirian recension)11.41

11.41
नमो नमस्तेऽस्तु सहस्रकृत्वः पुनश्च भूयोऽपि नमो नमस्ते । नमः पुरस्तादथ पृष्ठतस्ते नमोऽस्तु ते सर्वत एव सर्व ॥ ११-४१ ॥
namo namaste'stu sahasrakṛtvaḥ punaśca bhūyo'pi namo namaste | namaḥ purastādatha pṛṣṭhataste namo'stu te sarvata eva sarva || 11-41 ||
— आपको सहस्र बार नमस्कार हो ; — और फिर बार-बार भी आपको नमस्कार-नमस्कार ; — आगे से नमस्कार, फिर पीछे से नमस्कार ; — आपको सब ओर से नमस्कार हो, हे सर्व

आपको सहस्र बार नमस्कार हो, और फिर बार-बार भी आपको नमस्कार-नमस्कार हो! आपको आगे से और पीछे से नमस्कार; हे सर्व, आपको सब ओर से ही नमस्कार हो।