Bhagavad Gītā (Kashmirian recension)· 11.34 / 60

Bhagavad Gītā (Kashmirian recension)11.34

11.34
तस्मात्त्वमुत्तिष्ठ यशो लभस्व जित्वा शत्रून्भुङ्क्ष्व राज्यं समृद्धम् । मयैवैते निहताः पूर्वमेव निमित्तमात्रं भव सव्यसाचिन् ॥ ११-३४ ॥
tasmāttvamuttiṣṭha yaśo labhasva jitvā śatrūnbhuṅkṣva rājyaṃ samṛddham | mayaivaite nihatāḥ pūrvameva nimittamātraṃ bhava savyasācin || 11-34 ||
— अतः तू उठ, यश प्राप्त कर ; — शत्रुओं को जीतकर समृद्ध राज्य भोग ; — ये पहले से ही मेरे द्वारा मारे जा चुके ; — निमित्त मात्र बन, हे सव्यसाचिन्

अतः तू उठ, यश प्राप्त कर; शत्रुओं को जीतकर समृद्ध राज्य का भोग कर। ये पहले से ही मेरे द्वारा मारे जा चुके हैं; हे सव्यसाचिन्, तू केवल निमित्त मात्र बन।