Bhagavad Gītā (Kashmirian recension)· 11.22 / 60

Bhagavad Gītā (Kashmirian recension)11.22

11.22
रुद्रादित्या वसवो ये च साध्या विश्वेऽश्विनौ मरुतश्चोष्मपाश्च । गन्धर्वयक्षासुरसिद्धसङ्घा वीक्षन्ते त्वां विस्मिताश्चैव सर्वे ॥ ११-२२ ॥
rudrādityā vasavo ye ca sādhyā viśve'śvinau marutaścoṣmapāśca | gandharvayakṣāsurasiddhasaṅghā vīkṣante tvāṃ vismitāścaiva sarve || 11-22 ||
— रुद्र, आदित्य, वसु और जो साध्य ; — विश्वेदेव, अश्विन, मरुत् और ऊष्मपा ; — गन्धर्व, यक्ष, असुर, सिद्धों के समूह ; — सब विस्मित होकर आपको देखते हैं

रुद्र, आदित्य, वसु, साध्य, विश्वेदेव, दोनों अश्विन, मरुत्, ऊष्मपा (पितर), गन्धर्व, यक्ष, असुर और सिद्धों के समूह — ये सब विस्मित होकर आपको देखते हैं।