Bhagavad Gītā (Kashmirian recension)· 11.12 / 60

Bhagavad Gītā (Kashmirian recension)11.12

11.12
दिवि सूर्यसहस्रस्य भवेद्युगपदुत्थिता । यदि भाः सदृशी सा स्याद्भासस्तस्य महात्मनः ॥ ११-१२ ॥
divi sūryasahasrasya bhavedyugapadutthitā | yadi bhāḥ sadṛśī sā syādbhāsastasya mahātmanaḥ || 11-12 ||
— आकाश में सहस्र सूर्यों का ; — यदि एक साथ उदित हो ; — प्रकाश, वह शायद वैसा हो ; — उस महात्मा की प्रभा के

यदि आकाश में सहस्र सूर्यों का प्रकाश एक साथ उदित हो, तो वह प्रभा शायद उस महात्मा की प्रभा के समान हो।