Bhagavad Gītā (Kashmirian recension)· 1.26 / 47

Bhagavad Gītā (Kashmirian recension)1.26

1.26
तत्रापश्यत्स्थितान्पार्थः पितृनथ पितामहान् । आचार्यान्मातुलान्भ्रातॄन्पुत्रान्पौत्रान्सखींस्तथा ॥ १-२६ ॥
tatrāpaśyatsthitānpārthaḥ pitṛnatha pitāmahān | ācāryānmātulānbhrātṝnputrānpautrānsakhīṃstathā || 1-26 ||
— वहाँ उसने खड़े देखे ; — पार्थ ने ; — पिताओं और पितामहों को ; — आचार्यों, मामाओं, भाइयों को ; — पुत्रों, पौत्रों और मित्रों को भी

वहाँ पार्थ ने अपनी जगह खड़े पिताओं, पितामहों, आचार्यों, मामाओं, भाइयों, पुत्रों, पौत्रों और मित्रों को भी देखा,