Bhagavad Gītā (Kashmirian recension)· 1.19 / 47

Bhagavad Gītā (Kashmirian recension)1.19

1.19
स घोषो धार्तराष्ट्राणां हृदयानि व्यदारयत् । नभश्च पृथिवीं चैव तुमुलो व्यनुनादयन् ॥ १-१९ ॥
sa ghoṣo dhārtarāṣṭrāṇāṃ hṛdayāni vyadārayat | nabhaśca pṛthivīṃ caiva tumulo vyanunādayan || 1-19 ||
— वह घोष (उद्घोष) ; — धृतराष्ट्र के पुत्रों के ; — हृदयों को विदीर्ण कर गया ; — आकाश और पृथ्वी को ; — भयंकर ; — गुँजाता हुआ

आकाश और पृथ्वी को गुँजाता हुआ वह भयंकर शब्द धृतराष्ट्र के पुत्रों के हृदय को विदीर्ण कर गया।