The Great Liberation Tantra· 3.21 / 153

The Great Liberation Tantra3.21

3.21
अस्मत्कुले कुलश्रेष्ठो जातो ब्रह्मोपदेशिकः । किमस्माकं गयापिण्डैः किं तीर्थैः श्राद्धतर्पणैः ॥२१॥
asmatkule kulaśreṣṭho jāto brahmopadeśikaḥ | kimasmākaṃ gayāpiṇḍaiḥ kiṃ tīrthaiḥ śrāddhatarpaṇaiḥ ||21||
— हमारे कुल में ; — कुल-श्रेष्ठ ; — उत्पन्न हुआ ; — ब्रह्म का उपदेशक ; — हमें क्या ; — गया के पिण्डों से ; — क्या ; — तीर्थों से ; — श्राद्ध और तर्पणों से

'हमारे कुल में कुल-श्रेष्ठ, ब्रह्म का उपदेशक उत्पन्न हुआ! हमें गया के पिण्डों से क्या, तीर्थों से क्या, श्राद्ध और तर्पणों से क्या?'