अस्मत्कुले कुलश्रेष्ठो जातो ब्रह्मोपदेशिकः ।
किमस्माकं गयापिण्डैः किं तीर्थैः श्राद्धतर्पणैः ॥२१॥
asmatkule kulaśreṣṭho jāto brahmopadeśikaḥ |
kimasmākaṃ gayāpiṇḍaiḥ kiṃ tīrthaiḥ śrāddhatarpaṇaiḥ ||21||
'हमारे कुल में कुल-श्रेष्ठ, ब्रह्म का उपदेशक उत्पन्न हुआ! हमें गया के पिण्डों से क्या, तीर्थों से क्या, श्राद्ध और तर्पणों से क्या?'