The Great Liberation Tantra3.106
प्रातर्मध्याह्नसायाह्ने यथादेशे यथाऽसने ।
पूर्ववत् परमब्रह्म ध्यात्वा साधकसत्तमः ॥१०६॥
prātarmadhyāhnasāyāhne yathādeśe yathā'sane |
pūrvavat paramabrahma dhyātvā sādhakasattamaḥ ||106||
— प्रातः, मध्याह्न और सायंकाल में ; — यथायोग्य देश में ; — यथायोग्य आसन पर ; — पूर्ववत् ; — परम ब्रह्म का ; — ध्यान करके ; — साधकों में श्रेष्ठ प्रातः, मध्याह्न और सायंकाल में, यथायोग्य देश और आसन पर, पूर्ववत् परम ब्रह्म का ध्यान करके, साधकों में श्रेष्ठ