The Great Liberation Tantra· 2.33 / 54

The Great Liberation Tantra2.33

2.33
कृते विश्वहिते देवि विश्वेशः परमेश्वरि । प्रीतो भवति विश्वात्मा यतो विश्वं तदाश्रितम् ॥३३॥
kṛte viśvahite devi viśveśaḥ parameśvari | prīto bhavati viśvātmā yato viśvaṃ tadāśritam ||33||
— किए जाने पर ; — विश्व का हित ; — हे देवि ; — विश्वेश ; — हे परमेश्वरि ; — प्रसन्न ; — होते हैं ; — विश्वात्मा ; — क्योंकि ; — विश्व ; — उन्हीं पर आश्रित

हे देवि, हे परमेश्वरि, विश्व का हित किए जाने पर विश्वेश, विश्वात्मा प्रसन्न होते हैं; क्योंकि समस्त विश्व उन्हीं पर आश्रित है।