The Great Liberation Tantra2.32
यतो जगन्मङ्गलाय त्वयाऽहं विनियोजितः ।
अतस्ते कथयिष्यामि यद्विश्वहितकृद्भवेत् ॥३२॥
yato jaganmaṅgalāya tvayā'haṃ viniyojitaḥ |
ataste kathayiṣyāmi yadviśvahitakṛdbhavet ||32||
— चूँकि ; — जगत् के मंगल के लिए ; — तुम्हारे द्वारा ; — मैं ; — नियुक्त किया गया ; — अतः ; — तुमसे ; — कहूँगा ; — जो विश्व का हित करने वाला ; — हो चूँकि तुमने जगत् के मंगल के लिए मुझे नियुक्त किया है, अतः मैं तुमसे वह कहूँगा जो विश्व का हित करने वाला हो।