The Great Liberation Tantra2.30
यथा नरेषु तन्त्रज्ञाः सरितां जान्हवी यथा ।
यथाऽहं त्रिदिवेशानामागमानामिदं तथा ॥३०॥
yathā nareṣu tantrajñāḥ saritāṃ jānhavī yathā |
yathā'haṃ tridiveśānāmāgamānāmidaṃ tathā ||30||
— जैसे ; — मनुष्यों में ; — तन्त्रज्ञ (श्रेष्ठ) ; — नदियों में ; — गङ्गा ; — जैसे ; — जैसे मैं (श्रेष्ठ) ; — स्वर्ग के ईशों में ; — आगमों में ; — यह (तन्त्र) ; — वैसे ही जैसे मनुष्यों में तन्त्रज्ञ (श्रेष्ठ हैं), जैसे नदियों में गङ्गा, जैसे स्वर्ग के ईशों में मैं — वैसे ही आगमों में यह (तन्त्र श्रेष्ठ) है।