The Great Liberation Tantra1.24
लोष्टवत् परवित्तेषु पश्यन्तो मानवास्तदा ।
आसन् स्वधर्मनिरताः सदा सन्मार्गवर्त्तिनः ॥२४॥
loṣṭavat paravitteṣu paśyanto mānavāstadā |
āsan svadharmaniratāḥ sadā sanmārgavarttinaḥ ||24||
— मिट्टी के ढेले के समान ; — पराए धन में ; — देखते हुए ; — मनुष्य ; — तब ; — थे ; — अपने धर्म में निरत ; — सदा ; — सन्मार्ग पर चलने वाले पराए धन को मिट्टी के ढेले के समान देखते हुए, उस समय मनुष्य सदा अपने धर्म में निरत और सन्मार्ग पर चलने वाले थे।