The Great Liberation Tantra· 1.25 / 72

The Great Liberation Tantra1.25

1.25
न मिथ्याभाषिणः केचित् न प्रमादरताः क्वचित् । न चौरा न परद्रोहकारका न दुराशयाः ॥२५॥
na mithyābhāṣiṇaḥ kecit na pramādaratāḥ kvacit | na caurā na paradrohakārakā na durāśayāḥ ||25||
— नहीं ; — मिथ्याभाषी ; — कोई ; — नहीं ; — प्रमाद में रत ; — कहीं ; — नहीं ; — चोर ; — नहीं ; — दूसरों का द्रोह करने वाले ; — नहीं ; — दुष्ट आशय वाले

कोई मिथ्याभाषी नहीं था, कहीं कोई प्रमाद में रत नहीं था; न चोर थे, न दूसरों का द्रोह करने वाले, न दुष्ट आशय वाले।