The Great Liberation Tantra1.26
न मत्सरा नातिरुष्टा नातिलुब्धा न कामुकाः ।
सदन्तःकरणाः सर्वे सर्वदाऽनन्दमानसाः ॥२६॥
na matsarā nātiruṣṭā nātilubdhā na kāmukāḥ |
sadantaḥkaraṇāḥ sarve sarvadā'nandamānasāḥ ||26||
— नहीं ; — ईर्ष्यालु ; — अति क्रोधी नहीं ; — अति लोभी नहीं ; — नहीं ; — कामुक ; — शुद्ध अन्तःकरण वाले ; — सब ; — सदा आनन्द-चित्त वाले न ईर्ष्यालु, न अति क्रोधी, न अति लोभी, न कामुक; सभी शुद्ध अन्तःकरण वाले और सदा आनन्द-चित्त वाले थे।