समानो हार्दीषु दशासु नाडीषु सञ्चरन् समस्ते देहे साम्येन रसादीन् वाहयति । तत्र दिगष्टके सञ्चरन् तद्दिक्पतिचेष्टाम् इव प्रमातुः अनुकारयति
Transliteration (IAST)
samāno hārdīṣu daśāsu nāḍīṣu sañcaran samaste dehe sāmyena rasādīn vāhayati | tatra digaṣṭake sañcaran taddikpaticeṣṭām iva pramātuḥ anukārayati
समान हृदय से उत्पन्न दस नाड़ियों में संचरण करता हुआ समस्त देह में साम्य से रस आदि का वहन करता है। वह दिग्-अष्टक (आठ दिशाओं) में संचरण करता हुआ प्रमाता से उस-उस दिक्पति की चेष्टा का मानो अनुकरण कराता है।